ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8787.19वाल्मीकि रामायण 87.19उत्तिष्ठोत्तिष्ठ राजर्षे कार्दमेय महाबल । पुरुषत्वमृते सौम्य वरं वरय सुव्रत ।। ७.८७.१९ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय