ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8787.17वाल्मीकि रामायण 87.17ततो देवं महात्मानं शितिकण्ठं कपर्दिनम् । जगाम शरणं राजा सभृत्यबलवाहनः ।। ७.८७.१७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय