ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8585.8वाल्मीकि रामायण 85.8तथा ब्रुवति देवेशे देवा वाक्यमथाब्रुवन् । एवमेतन्न सन्देहो यथा वदसि दैत्यहन् ।। ७.८५.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय