ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8484.2वाल्मीकि रामायण 84.2अश्वमेधो महायज्ञः पावनः सर्वपाप्मनाम् । पावनस्तव दुर्धर्षो रोचतां रघुनन्दन ।। ७.८४.२ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय