ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8181.13वाल्मीकि रामायण 81.13स तथोक्त्वा मुनिजनमरजामिदमब्रवीत् । इहैव वस दुर्मेधे आश्रमे सुसमाहिता ।। ७.८१.१३ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय