ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 8080.16वाल्मीकि रामायण 80.16एवमुक्त्वा तु तां कन्यां दोर्भ्यां गृह्य बलाद्बली । विस्फुरन्तीं यथाकामं मैथुनायोपचक्रमे ।। ७.८०.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय