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वाल्मीकि रामायण 80.10

यदि वान्यन्मया कार्यं धर्मदृष्टेन सत्पथा ।
वरयस्व नरश्रेष्ठ पितरं मे महाद्युतिम् ।। ७.८०.१० ॥

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