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वाल्मीकि रामायण 8.10

माल्यवद्भुजनिर्मुक्ता शक्तिर्घण्टाकृतस्वना ।
हरेरुरसि बभ्राज मेघस्थेव शतह्रदा ।। ७.८.१० ॥

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