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वाल्मीकि रामायण 79.8

प्रीतो ऽस्मि परमोदार त्वं कर्ता ऽसि न संशयः ।
दण्डेन च प्रजा रक्ष मा च दण्डमकारणे ।। ७.७९.८ ॥

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