ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 7979.17वाल्मीकि रामायण 79.17स दण्डस्तत्र राजाभूद्रम्ये पर्वतरोधसि । पुरं चाप्रतिमं राम न्यवेशयदनुत्तमम् ।। ७.७९.१७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय