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वाल्मीकि रामायण 78.29

प्रनष्टे तु शरीरे ऽसौ राजर्षिः परया मुदा ।
तृप्तः प्रमुदितो राजा जगाम त्रिदिवं सुखम् ।। ७.७८.२९ ॥

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