ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 7878.14वाल्मीकि रामायण 78.14पितामहस्तु मामाह तवाहारः सुदेवज । स्वादूनि स्वानि मांसानि तानि भक्षय नित्यशः ।। ७.७८.१४ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय