ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 7777.8वाल्मीकि रामायण 77.8प्रभाते काल्यमुत्थाय सरस्तदुपचक्रमे । अथापश्यं शवं तत्र सुपुष्टमजरं क्वचित् ।। ७.७७.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय