ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 7676.28वाल्मीकि रामायण 76.28उष्यतां चेह रजनी सकाशे मम राघव । प्रभाते पुष्पकेण त्वं गन्ता ऽसि पुरमेव हि ।। ७.७६.२८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय