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वाल्मीकि रामायण 76.22

प्रतिगृह्य ततः पूजां सम्पूज्य च महामुनिम् ।
जग्मुस्ते त्रिदशा हृष्टा नाकपृष्ठं सहानुगैः ।। ७.७६.२२ ॥

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