ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 7575.16वाल्मीकि रामायण 75.16कस्यां योन्यां तपोवृद्ध वर्तसे दृढविक्रम । कौतूहलात्त्वां पृच्छामि रामो दाशरथिर्ह्यहम् ।। ७.७५.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय