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वाल्मीकि रामायण 74.27

भविष्यच्छूद्रयोन्यां वै तपश्चर्या कलौ युगे ।
अधर्मः परमो राजन्द्वापरे शूद्रजन्मनः ।। ७.७४.२७ ॥

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