Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 72.17

तस्मात्त्वं वस काकुत्स्थ सप्तरात्रमिहावस ।
ऊर्ध्वं गन्तासि मधुरां सभृत्यबलवाहनः ।। ७.७२.१७ ॥

पूरा अध्याय