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वाल्मीकि रामायण 72.12

स मे प्रसादं काकुत्स्थ कुरुष्वामितविक्रम ।
मातृहीनो यथा वत्सो न चिरं प्रवसाम्यहम् ।। ७.७२.१२ ॥

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