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वाल्मीकि रामायण 71.14

स भुक्तवान्नरश्रेष्ठो गीतमाधुर्यमुत्तमम् ।
शुश्राव रामचरितं तस्मिन्काले यथाकृमम् ।। ७.७१.१४ ॥

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