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वाल्मीकि रामायण 69.5

ऋषयो ऽप्यद्य पापात्मन्मया त्वां निहतं रणे ।
पश्यन्तु विप्रा विद्वांसस्त्रिदशा इव रावणम् ।। ७.६९.५ ॥

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