ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 6666.15वाल्मीकि रामायण 66.15स गत्वा यमुनातीरं सप्तरात्रोषितः पथि । ऋषीणां पुण्यकीर्तीनामाश्रमे वासमभ्ययात् ।। ७.६६.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय