ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 6565.33वाल्मीकि रामायण 65.33स राजा सह पत्न्या वै प्रणिपत्य मुहुर्मुहुः । पुनर्वसिष्ठं प्रोवाच यदुक्तं ब्रह्मरूपिणा ।। ७.६५.३३ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय