ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 6363.8वाल्मीकि रामायण 63.8कामकारो ह्यहं राजंस्तवास्मि पुरुषर्षभ । अधर्मं जहि काकुत्स्थ मत्कृते रघुनन्दन ।। ७.६३.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय