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वाल्मीकि रामायण 61.9

यावत्सुरैश्च विप्रैश्च न विरुध्येर्महासुर ।
तावच्छूलं तवेदं स्यादन्यथा नाशमेप्यति ।। ७.६१.९ ॥

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