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वाल्मीकि रामायण 6.53

भौमाश्चैवान्तरिक्षाश्च कालाज्ञप्ता भयावहाः ।
उत्पाता राक्षसेन्द्राणामभावाय समुत्थिताः ।। ७.६.५३ ॥

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