ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 66.45वाल्मीकि रामायण 6.45युद्धाय निर्ययुः क्रुद्धा जम्भवृत्रबला इव । । ७.६.४५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय