ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 66.26वाल्मीकि रामायण 6.26तदस्माकं हितार्थाय जहि तांश्च त्रिलोचन । राक्षसान्हुङ्कृतेनैव दह प्रदहतां वर ।। ७.६.२७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय