ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5959.17वाल्मीकि रामायण 59.17तमेवमुक्त्वा राजर्षिः पूरुं राज्यविवर्धनम् । अभिषेकेण सम्पूज्य आश्रमं प्रविवेश ह ।। ७.५९.१७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय