ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5757.4वाल्मीकि रामायण 57.4यस्तु कुम्भो रघुश्रेष्ठ तेजःपूर्णो महात्मनोः । तस्मिंस्तेजोमयौ विप्रौ सम्भूतावृषिसत्तमौ ।। ७.५७.४ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय