ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5656.15वाल्मीकि रामायण 56.15स तां पद्मपलाशाक्षीं पूर्णचन्द्रनिभाननाम् । वरुणो वरयामास मैथुनायाप्सरोवराम् ।। ७.५६.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय