ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5252.8वाल्मीकि रामायण 52.8आर्यस्याज्ञां पुरस्कृत्य विसृज्य जनकात्मजाम् । गङ्गातीरे यथोद्दिष्टे वाल्मीकेराश्रमे शुचौ ।। ७.५२.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय