ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 5252.15वाल्मीकि रामायण 52.15यदर्थं मैथिली त्यक्ता अपवादभयान्नृप । सो ऽपवादः पुरे राजन्भविष्यति न संशयः ।। ७.५२.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय