ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 55.43वाल्मीकि रामायण 5.43मालेस्तु वसुधा नाम गन्धर्वी रूपशालिनी । भार्यासीत्पद्मपत्राक्षी स्वक्षी यक्षीवरोपमा ।। ७.५.४२ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय