Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 5.25

त्रिंशद्योजनक्स्तीर्णा शतयोजनमायता ।
स्वर्णप्राकारसंवीता हेमतोरणसंवृता ।। ७.५.२५ ॥

पूरा अध्याय