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वाल्मीकि रामायण 48.4

किं नु पापं कृतं पूर्वं को वा दारैर्वियोजितः ।
या ऽहं शुद्धसमाचारा त्यक्ता नृपतिना सती ।। ७.४८.४ ॥

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