ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 4848.16वाल्मीकि रामायण 48.16यत्तु पौरजनो राजन्धर्मेण समवाप्नुयात् । अहं तु नानुशोचामि स्वशरीरं नरर्षभ ।। ७.४८.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय