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वाल्मीकि रामायण 46.19

ततो वासमुपागम्य गोमतीतीर आश्रमे ।
प्रभाते पुनरुत्थाय सौमित्रिः सूतमब्रवीत् ।। ७.४६.१९ ॥

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