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वाल्मीकि रामायण 45.9

एवं शुद्धसमाचारा देवगन्धर्वसन्निधौ ।
लङ्काद्वीपे महेन्द्रेण मम हस्ते निवेशिता ।। ७.४५.९ ॥

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