ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 4545.25वाल्मीकि रामायण 45.25शोकसंलग्नहृदयो निशश्वास यथा द्विपः । । ७.४५.२५ ।।पिछलापूरा अध्याय