ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 4242.16वाल्मीकि रामायण 42.16बह्वासनगृहोपेतां लतागृहसमावृताम् । अशोकवनिकां स्फीतां प्रविश्य रघुनन्दनः ।। ७.४२.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय