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वाल्मीकि रामायण 41.5

निर्जितस्त्वं नरेन्द्रेण राघवेण महात्मना ।
निहत्य युधि दुर्धर्षं रावणं राक्षसेश्वरम् ।। ७.४१.५ ॥

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