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वाल्मीकि रामायण 41.3

सौम्य राम निरीक्षस्व सौम्येन वदनेन माम् ।
कुबेरभवनात्प्राप्तं विद्धि मां पुष्पकं प्रभो ।। ७.४१.३ ॥

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