ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 44.21वाल्मीकि रामायण 4.21अवश्यमेव दातव्या परस्मै सेति सन्ध्यया । चिन्तयित्वा सुता दत्ता विद्युत्केशाय राघव ।। ७.४.२१ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय