ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 44.18वाल्मीकि रामायण 4.18विद्युत्केशो हेतिपुत्रः स दीप्तार्कसमप्रभः । व्यवर्धत महातेजास्तोयमध्य इवाम्बुदः ।। ७.४.१८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय