ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 44.16वाल्मीकि रामायण 4.16स कालभगिनीं कन्यां भयां नाम भयावहाम् । उदावहदमेयात्मा स्वयमेव महामतिः ।। ७.४.१६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय