ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3838.18वाल्मीकि रामायण 38.18तद्भवानद्य काशेय पुरीं वाराणसीं व्रज । रमणीयां त्वया गुप्तां सुप्रकाशां सुतोरणाम् ।। ७.३८.१८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय