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वाल्मीकि रामायण 37.17

भरतो लक्ष्मणश्चात्र शत्रुघ्नश्च महायशाः ।
उपासाञ्चक्रिरे हृष्टा वेदास्त्रय इवाध्वरम् ।। ७.३७.१७ ॥

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