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वाल्मीकि रामायण 37.13

कृतोदकशुचिर्भूत्वा काले हुतहुताशनः ।
देवागारं जगामाशु पुण्यमिक्ष्वाकुसेवितम् ।। ७.३७.१३ ॥

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