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वाल्मीकि रामायण 36.6

मरुद्रोधाद्विनिर्मुक्तास्ताः प्रजा मुदिता ऽभवन् ।
शीतदाहविनिर्मुक्ताः पद्मिन्य इव साम्बुजाः ।। ७.३६.६ ॥

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